Monday, January 7, 2008

मैं बात करना चाहता हूँ उस लड़की से


मैं बात करना चाहता हूँ उस लड़की से
जिसको तलाश है मेरी तरह उस सुख की
जो बना ही नहीं कभी
या जो शायद बाँट चुका है
हाँ उसके पास बैठ कर लम्हा दो लम्हा रो लेना चाहता हूँ
जो मेरे प्यार की तरह छत पर खड़ी रहती है
दो बूँद पानी से भीगने को उस बदल के नीचे
जो छण्ट चुका है
हमारे हिस्से का सारा सुख शायद बँट चुका है

मैं उस लड़की की तलाश में खो जाना चाहता हूँ
जो मेरी तरह ही समंदर के साहिल पर शाम-ओ-सहर
घूमती रहती है किसी नाम को खोजती हुई
रह रह कर सोचती हुई
रेत पर अंगुली से यहीं कहीं तो लिखा था उसने
मेरी तरह उसको भी मालूम नहीं की
वक़्त की लहरों से हरफ़ हरफ़ मिट चुका है
समंदर की हथेलियों में नांहा सा वो वजूद
कब का सिमट चुका है

हाँ मैं उस लड़की की तरह महसूस करना चाहता हूँ
आँखों मैं नामी
ज़िंदगी मैं कोई कमी
और समझ लेना चाहते हूँ अपनी उम्र का हिसाब
मैं कसम ले चुका हूँ और उसे भी कसम देना चाहता हूँ की
आवाज़ ना देगी उस पल को कभी
जो किसी और तरफ़ पलट चुका है
हमरी राह से हमारी दिशा से हट चुका है

मैं उस लड़की के क़रीब बैठ कर
कुछ देर सुस्तना चाहता हूँ
जो मेरी ही तरह थक चुकी है