
सखी कैसे मैं पंछी बन जाऊँ
उड़कर तुमसे मिलने आऊँ
उड़कर तुमसे मिलने आऊँ
तुमने प्यार दिया है मुझको
कैसे मैं चुकता कर पाऊँ
कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।
जोड़ा क्यों अनबूझ ये रिश्ता
कैसे मैं बन जाऊँ फरिश्ता
तुमसे बार-बार मिलने को कैसे
यह जीवन दुहराऊँ कैसे
मैं पंछी बन जाऊँ।
तुम हो जैसे श्वेत कबूतर
चंचल चतुर मुक्त औ आतुर
मैं बंधन में बँधा परिंदा
कैसे तुम जैसा बन जाऊँ
कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।
चलो, भूल जाऊँ मैं तुमको
याद करो ना जो तुम मुझको
मन से निकली उन लहरों को
सखी कैसे मैं वापस कर पाऊँ
कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।
सखी तुम कहा हो !