Thursday, January 31, 2008

सखी कैसे मैं पंछी बन जाऊँ


सखी कैसे मैं पंछी बन जाऊँ
उड़कर तुमसे मिलने आऊँ

तुमने प्यार दिया है मुझको

कैसे मैं चुकता कर पाऊँ

कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।


जोड़ा क्यों अनबूझ ये रिश्ता

कैसे मैं बन जाऊँ फरिश्ता

तुमसे बार-बार मिलने को कैसे

यह जीवन दुहराऊँ कैसे

मैं पंछी बन जाऊँ।

तुम हो जैसे श्वेत‍ कबूतर

चंचल चतुर मुक्त औ आतुर

मैं बंधन में बँधा परिंदा

कैसे तुम जैसा बन जाऊँ

कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।


चलो, भूल जाऊँ मैं तुमको

याद करो ना जो तुम मुझको

मन से निकली उन लहरों को

सखी कैसे मैं वापस कर पाऊँ

कैसे मैं पंछी बन जाऊँ।

सखी तुम कहा हो !