‘अच्छा तो हम चलते हैं’
की पंक्तियां तो बहुत पुराने गाने की हैं पर आजकल के प्रेमियों पर सटीक बैठती हैं।इस बदलते समाज ने प्रेम की परिभाषा को भी बदल के रख दिया है।आजकल प्रेम की उम्र लम्बी नहीं होती है। जब तक विचार मिले,तब तक ठीक है पर जहां विचारों में जरा भी मतभेद हुआ वहीं से प्रेमी एक दूसरे को कहते हैं-अच्छा तो हम चलते हैं।और ‘फिर कब मिलोगे’ वाली पंक्तियों की आवश्यकता यहां कभी नहीं पड़ती क्योंकि जल्द ही उन्हें कोई और मिल जाता है।ये प्रेम की नयी व्याख्या है जो प्रेमियों ने अपनी सहूलियत के लिये स्वयं निर्मित की है।पर इन दोनों परिभाषाओं में वही अंतर है जो कागज के फूलों और असली फूलों में होता है।प्रेम की भीनी उस सुगन्ध का जो कभी प्रेमियों के ह्दय सें आती थी।आजकल की भागती –दौड़ती जिन्दगी में प्रेम भी केवल टाइम-पास का जरिया बन गया है।युवा प्रेमी मिलते हैं साथ घूमते हैं खाते-पीते हैं पर विवाह का इरादा नहीं रखते हैं।और ना ही एक-दूसरे की जिन्दगी में हस्तक्षेप करते हैं।इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जो कि बॉयफ्रेन्ड या गर्लफ्रेन्ड केवल इसलिये बनाते हैं क्योकिं ये आजकल का फैशन है
आजकल की भागती –दौड़ती जिन्दगी में प्रेम भी केवल टाइम-पास का जरिया बन गया है।युवा प्रेमी मिलते हैं साथ घूमते हैं खाते-पीते हैं पर विवाह का इरादा नहीं रखते हैं।और ना ही एक-दूसरे की जिन्दगी में हस्तक्षेप करते हैं।इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जो कि बॉयफ्रेन्ड या गर्लफ्रेन्ड केवल इसलिये बनाते हैं क्योकिं ये आजकल का फैशन है और उनके स्मार्ट होने का प्रमाण है।100 मे से 70 लड़कियां प्रेम को केवल समय बिताने का जरिया मानती हैं और अपने माता-पिता की पसन्द से शादी करना पसन्द करती हैं।दूसरी तरफ ज्यादातर लड़कों की सोच भी यही है।विशेष रूप से कालेज,स्कूल आदि में आजकल प्रेम की इसी नयी परिभाषा को जिसे अंग्रेजी में ‘वन नाइट स्टैन्ड लव’ भी कहा जाता है को तव्वजो दे रहे हैं।कारण है कि जब हमारी पूरी संस्कृति पश्चिमी सभ्यता में रंगती जा रही है तो भला प्रेम इसके रंग में सराबोर होने से कैसे बच पाऐगा।पर अंत में केवल यही कहना चाहूंगी कि इस तरह के प्रेम में अंत में अकेलेपन और मानसिक कुंठा के सिवा कुछ हासिल नहीं होगा।और ना ही इस तरह का रिवाज चिरस्थाई होगा। प्रेम एक दिमागी फितूर है। इसके सिवाय कुछ नहीं है। सदियों से जाने कितने लोग इसे खोजने की असफल कोशिश कर चुके हैं। जबकि, ये एक विशेष मन:स्थिति है। जो, समय, परिस्थितियों के अनुसार पल-पल बदल जाती है। ये भौतिक सच्चाई हमें मान लें तो, प्रेम की सही खोज पूर्ण हो जाएगी। शायद इसीलिए हम कहते हैं अच्छा तो हम चलते हैं।
Saturday, December 29, 2007
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