Monday, March 3, 2008

सपने सच नहीं होते


मैंने कामना नहीं की

निरंतर सुख की

मैं जानता हूं

यह सहज नहीं

कल्‍पना की उड़ानें

नहीं भरी मैंने

क्‍योंकि यथार्थ यही है

की उड़ने के बाद भी

इसी जमीन पर उतरना है

मैंने कोई सपना नहीं देखा

क्‍योंकि सपने सच नहीं होते

वे तो अंधेरे के उस मोती के समान है

जो सुबह होते ही फूट जाते हैं...

यूं सपने में होना भी

सुख है.. मैं जानता हूं ...

क्या आप जानते है.....?

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