
कल रात बर्दास्त नही हुआ
और.. मैंने नींद खरीदी
दाखिल हुआ बिस्तर
के पहलू मे......
मय के आगोश मे अपना
होश छोड़ कर
तार- तार कर दिया
अपना वजूद
जहा टिका रहता था
तेरा अक्स
आज सोच रहा हूँ
कल मैंने ऐसा क्यो किया ?
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे...
1 comment:
बहुत खूब. मुझे भी बताए यह नींद कहाँ बिकती हैं....
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