
तेरे आने की उम्मीद
मेरी तन्हाइयों में,
जब भी ख्याल आता है, कि
इस जहां में अकेले है हम,
याद आता है तुम्हारा वो वादा,
जब तुमने कहा था कि
साथ हम रहेंगे सदा,
कहां गये वो वादे,
वो कसमें, वो इरादे,
जाने से पहले कम से कम
कह कर तो जाते,
क्या तुम्हे मालूम नहीं था
कि तुम्हारा रस्ता मैं कभी न रोकूंगा
क्या यही तुम्हारा यकीं था,
इसी भरोसे के दम पर,
हम साथ चले थे, एक दूजे का हाथ थाम कर
सोचता हूँ शायद वो दिन फिर से वापस आ जायें
इसी उम्मीद में जी रहा हूँ कि शायद तुम लौट आओ
क्या मेरी उम्मीद पुरी होगी.......????
कौन देगा जवाब....तुम या वो.......
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