
खुद को बाँट लिया है हमने कई हिस्सों में,
जिंदगी भी तो मिली है मुझे कई हिस्सों मे
जीने की तमन्ना, पाने की हसरत,
खो जाने का खौफ, ऐसे ही कई किस्सों मे
चाहकर भी जिसे भूल न पाए हम,
हो गया जुदा हमसे वो चंद लम्हों मे
दिल की तड़प कोई क्या जाने,
किस राह से गुज़रे हम इन रिश्तों मे
मांग बैठे थे खुदा से उसको कुछ इस तरह्,
देखा नहीं कुछ भी जमाने की रस्मों मे
मौसम कितने ही आए और गए,
फ़िर भी हम जीते रहे, मरते रहे ....
1 comment:
अच्छा लिखा है।
Post a Comment